उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere gawah ne kaisa bayan rakkha hai

तिरे गवाह ने कैसा बयान रक्खा है

ترے گواہ نے کیسا بیان رکھا ہے

शायर: Chandra Shekhar Varma7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे गवाह ने कैसा बयान रक्खा है
कहा है झूट मगर सच का ध्यान रक्खा है

पता लगाओ कि वो ख़ुद को क्या समझता है
जहान-भर ने ख़ुदा जिस को मान रक्खा है

न जाने कब किसी के वास्ते धड़कना हो
सो दिल ने ख़ुद को अभी तक जवान रक्खा है

ज़बाँ पे आती हुई दिल की बात से डर कर
किसी ने मुँह में अचानक से पान रक्खा है

ख़ुदा के पास इज़ाफ़ी था फ़ासला जितना
वो उस ने तेरे मिरे दरमियान रक्खा है

जो काटता है उसे दी ज़बान लम्बी सी
जो कट रहा है उसे बे-ज़बान रक्खा है

सुनोगे बात तो तुम सब की ध्यान से 'शेखर'
करोगे तुम वही जो तुम ने ठान रक्खा है