उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere gham ki jab tak sui chal rahi hai

तिरे ग़म की जब तक सुई चल रही है

ترے غم کی جب تک سوئی چل رہی ہے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे ग़म की जब तक सुई चल रही है
मिरी ज़िंदगी की घड़ी चल रही है

वफ़ा के सफ़र में अकेला नहीं हूँ
मिरे साथ तेरी कमी चल रही है

बहुत फूल खिलते हैं आँखों में मेरी
अभी तक पुरानी नमी चल रही है

लतीफ़े सुना ऐ ग़ज़ल चुपके-चुपके
बराबर में संजीदगी चल रही है

धमक हो रही है ख़यालों की छत पर
बहुत ज़ोर से ख़ामुशी चल रही है

क़लम के फिसलने से डर लग रहा है
मोहब्बत अभी काग़ज़ी चल रही है

मैं आया था महफ़िल में 'उन्वान सुन कर
कहानी मगर दूसरी चल रही है