उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tera majaz haqiqat se ham-kanar bhi hai

तिरा मजाज़ हक़ीक़त से हम-कनार भी है

ترا مجاز حقیقت سے ہم کنار بھی ہے

शायर: Zaheen Shah Taji10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरा मजाज़ हक़ीक़त से हम-कनार भी है
जो आश्कार नहीं है वो आश्कार भी है

वो आब-ओ-गिल कि नवाज़ा है आप ने जिस को
वही मज़ार भी है साहिब-ए-मज़ार भी है

बहार-ए-‘आलम-ए-जाँ तीरा-ख़ाक-दाँ में कहाँ
तिरा करम है कि ये ख़ाक-दाँ बहार भी है

ये मेहर-ओ-माह ये अंजुम ये कहकशाँ ये फूल
हर एक तेरे तबस्सुम की यादगार भी है

तिरा मज़ाक़-ए-मोहब्बत है कुफ़्र-ओ-दीं से बुलंद
मगर वो माया-ए-नूर-ओ-मता’-ए-नार भी है

सुरूर-ए-मज्लिस-ए-रुहानीयाँ तिरे दम से
तमाम ‘आलम-ए-अज्साम कैफ़-बार भी है

ये मेरी जान के आईने में तिरी तस्वीर
ये इस्ति'आरा-ए-जाँ तुझ से मुस्त'आर भी है

त’अय्युनात की परवरदिगार-ओ-ख़ालिक़ है
वो एक तेरी तवज्जोह कि बे-शुमार भी है

सदा-ए-कुन-फ़यकून 'इल्म से इरादा है
उसी इरादे पे तकवीन का मदार भी है

सदा-ए-कुन-फ़य-कून 'इल्म से इरादा है
इरादा ‘ऐन मुरीद-ओ-मुराद-ए-यार भी है