उर्दू शायरी · ग़ज़ल

thoDi si waz oDh li aur waz-dar ho gae

थोड़ी सी वज़' ओढ़ ली और वज़'-दार हो गए

تھوڑی سی وضع اوڑھ لی اور وضع دار ہو گئے

शायर: Ehtisham ul Haq Siddiqui6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थोड़ी सी वज़' ओढ़ ली और वज़'-दार हो गए
अस्हाब-ए-इज़-ओ-जाह में हम भी शुमार हो गए

हम भी चटान थे मगर ज़र्ब-ए-शदीद वक़्त से
हर लम्हा टूटते रहे आख़िर ग़ुबार हो गए

तरकश में जिस के तीर थे न हाथ में कमान थी
शूमी-ए-बख़्त देखते उस का शिकार हो गए

मंडी में ले तो आए हो लेकिन वो बिक न पाएँगे
मौसम-ए की मार से जो फूल दाग़दार हो गए

शर्म-ओ-हया अदब के जो थे कुछ लिबास-ए-फ़ाख़िरा
घर में रखे रखे ही वो तार तार हो गए

सब के हुक़ूक़ कुछ न कुछ हैं क़र्ज़ मेरी ज़ात पर
कैसे चुकाऊँगा वहाँ इतने उधार हो गए