उर्दू शायरी · ग़ज़ल

thi nai kafir-ada ki shan hanste bolte

थी नई काफ़िर-अदा की शान हँसते बोलते

تھی نئی کافر ادا کی شان ہنستے بولتے

शायर: Chandar Bhan Kaifi Dehelvi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थी नई काफ़िर-अदा की शान हँसते बोलते
'आशिक़ों ने दे दिया ईमान हँसते बोलते

वस्ल के होने लगे सामान हँसते बोलते
मुश्किलें अपनी हुईं आसान हँसते बोलते

ग़ैर की जानिब है चेहरा हाथ हैं मेरी तरफ़
दे रहे हैं किस अदा से पान हँसते बोलते

जांकनी में मौत के क्या क्या मज़े लेते रहे
'आशिक़ों ने दी ख़ुदा को जान हँसते बोलते

ख़ंदा-आमेज़ी मिरे ज़ख़्म-ए-जिगर की देखना
आ रहे हैं यार के पैकान हँसते बोलते

सैंकड़ों दिलबर हज़ारों जान के गाहक बने
'आशिक़ों की चल गई दूकान हँसते बोलते

महफ़िल-ए-जानाँ में उस ने आप ही पहुँचा दिया
यार अपना हो गया दरबान हँसते बोलते

हम-पियाला वो हुए 'कैफ़ी' दम-ए-बादा-कशी
हो गए पूरे मिरे अरमान हँसते बोलते