उर्दू शायरी · ग़ज़ल

thi mohabbat kabhi faqat tum se

थी मोहब्बत कभी फ़क़त तुम से

تھی محبت کبھی فقط تم سے (ردیف .. ب)

शायर: Zaheen Shah Taji11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थी मोहब्बत कभी फ़क़त तुम से
आज हर चीज़ बन गई महबूब

थे कभी तुम ही मर्कज़-ए-ख़ूबी
आज कोई भी शय नहीं ना-ख़ूब

आज मतलूब ज़र्रा ज़र्रा है
तुम ही तुम थे कभी मिरा मतलूब

'इश्क़ मंसूब था कभी तुम से
आज तुम भी हो 'इश्क़ से मंसूब

मैं नहीं मैं न आज तुम हो तुम
हो गए एक तालिब-ओ-मतलूब

'इश्क़ तन्हा हक़ीक़त-ए-'आलम
ये हक़ीक़त मजाज़ से महजूब

होश है जुज़्व और मस्ती कुल
हुस्न सालिक है 'इश्क़ है मज्ज़ूब

होशियारी है हुस्न में ख़ूबी
होशियारी है 'इश्क़ में मा'यूब

इक तबस्सुम है दूसरा है आह
एक यूसुफ़ है दूसरा या'क़ूब

बे-क़रारी में 'इश्क़ गिरया-ए-नूह
सब्र में 'इश्क़ हज़रत-ए-अय्यूब

राह-ए-इख़्लास में ख़लील है 'इश्क़
'इश्क़ में वहम-ए-ग़ैर है मस्लूब