उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Thaharne ka sabab koi nahin hai

ठहरने का सबब कोई नहीं है

ٹھہرنے کا سبب کوئی نہیں ہے

शायर: Badr Muneer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ठहरने का सबब कोई नहीं है
पस-ए-दीवार जब कोई नहीं है

ये दिल मस्कन ख़ुमार-ए-राएगाँ का
यहाँ जश्न-ए-तरब कोई नहीं है

बड़ी 'इज़्ज़त है मेरी उस के दिल में
सर-ए-महफ़िल अदब कोई नहीं है

बहुत कुछ माँगते हैं अहल-ए-दुनिया
मगर हुस्न-ए-तलब कोई नहीं है

मोहब्बत के सराब-ए-मुस्तक़िल में
हिसाब-ए-रोज़-ओ-शब कोई नहीं है

अंधेरे किस तरह काफ़ूर होंगे
किसी में ताब-ओ-तब कोई नहीं है