उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tewar bhed batate hain ye nam-alud hawaon ke

तेवर भेद बताते हैं ये नम-आलूद हवाओं के

تیور بھید بتاتے ہیں یہ نم آلود ہواؤں کے

शायर: Iftikhar Haidar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेवर भेद बताते हैं ये नम-आलूद हवाओं के
आज ज़रा खुल खेलने वाले हैं अंदाज़ घटाओं के

कमरा बंद किया और सारे ज़ब्त के बंधन टूट गए
आँखें ढीली छोड़ीं रस्ते खोल दिए दरियाओं के

दोगाना आज़ार है साहब हम जैसों की क़िस्मत में
हम मुहताज रवय्यों के और हम मजबूर अनाओं के

देख ले कितने कष्ट उठा कर तेरे दर तक पहुँचा हूँ
देख ले पपड़ी होंटों की और देख ले छाले पाँव के

खाइयाँ हैं खड्डे रोड़े हैं कंकर पत्थर हैं लेकिन
जन्नत के रस्ते लगते हैं सारे रस्ते गाँव के

उन की चाह में क़र्या क़र्या बस्ती बस्ती घूम लिए
उन की चाह में कोने खुदरे छान लिए सहराओं के

हम जो बज़्म-ए-ग़ैर में अक्सर उन की बातें करते हैं
तपती धूप में लुत्फ़ लिया करते हैं ठंडी छाँव के

तोड़ के रस्म-ए-अहद-ए-वफ़ा को आख़िर छोड़ ही जाना था
पिंजरे में आ बैठे थे पंछी आज़ाद फ़ज़ाओं के

हम मेहराब और मिम्बर वालों की आँखों को चुभते हैं
हम ने 'अक़्ल को रहबर माना हम मफ़रूर ख़ुदाओं के