उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri ummid ke asbab nazar aate nahin

तेरी उम्मीद के अस्बाब नज़र आते नहीं

تیری امید کے اسباب نظر آتے نہیں

शायर: Aamir Shauqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी उम्मीद के अस्बाब नज़र आते नहीं
क्यों मुझे कोई हसीं ख़्वाब नज़र आते नहीं

इतना भटका हूँ अज़िय्यत के बयाबाँ में कि अब
कोई भी लम्हा-ए-नायाब नज़र आते नहीं

किस क़दर धुँदले हैं मज़लूम की आहों से फ़लक
मेहर-ओ-अंजुम हूँ कि महताब नज़र आते नहीं

दस्त-बरदार नहीं रस्म-ए-तअ'ल्लुक़ से मैं
फिर भला क्यों मुझे अहबाब नज़र आते नहीं

इतनी दूरी है अब उन से कि मुझे ऐ 'शौक़ी'
चैन से हैं कि वो बेताब नज़र आते नहीं