उर्दू शायरी · ग़ज़ल

masale aur bhi hain ishq ke aazar ke sath

मसअले और भी हैं इश्क़ के आज़ार के साथ

مسئلے اور بھی ہیں عشق کے آزار کے ساتھ

शायर: Aamir Shauqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मसअले और भी हैं इश्क़ के आज़ार के साथ
सिर्फ़ इक कर्ब नहीं उम्र की रफ़्तार के साथ

हाए महरूमी-ए-क़िस्मत कि तुझे पा न सके
हम हर इक सम्त गए हसरत-ए-दीदार के साथ

कैसे मैं आप की ताज़ीम बजा लाऊँगा
मेरी बनती ही नहीं हाशिया-बरदार के साथ

अभी ख़ुश-रंग है ताबानी मिरे आँगन की
रंजिशें होने लगीं क्यों दर-ओ-दीवार के साथ

दर्स देते हैं बहुत लोग पयम्बर वाले
बैठता कोई नहीं मुफ़लिस-ओ-नादार के साथ

उस के हिस्से का भी ग़म मुझ को अता कर दे मगर
अन-गिनत ख़ुशियाँ रहीं मौला मिरे यार के साथ

गुफ़्तुगू का भी सलीक़ा नहीं जिन को 'शौकी'
आज फिरते हैं वही मंसब-ओ-दस्तार के साथ