उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nasib mein hai judai to rona-dhona kya

नसीब में है जुदाई तो रोना-धोना क्या

نصیب میں ہے جدائی تو رونا دھونا کیا

शायर: Aamir Shauqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नसीब में है जुदाई तो रोना-धोना क्या
है सारी चीज़ पराई तो रोना-धोना क्या

यहाँ तो अपने ही अपनों को मार देते हैं
हवा ने शम्अ बुझाई तो रोना-धोना क्या

उसी ने हाथ बढ़ाया था दोस्ती के लिए
उसी ने बात बढ़ाई तो रोना-धोना क्या

मिरे अज़ीज़ ही जब मेरे मुन्हरिफ़ निकले
हुई ख़िलाफ़ ख़ुदाई तो रोना-धोना क्या

हज़ार साल के जब बूढ़े मर गए 'शौकी'
कमाई चीज़ गँवाई तो रोना-धोना क्या