उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Dubte Dubte suraj ne ziyaen din hain

डूबते डूबते सूरज ने ज़ियाएँ दीं हैं

ڈوبتے ڈوبتے سورج نے ضیائیں دیں ہیں

शायर: Aamir Shauqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

डूबते डूबते सूरज ने ज़ियाएँ दीं हैं
तेरी यादों ने बहुत दिल को सदाएँ दीं हैं

ये अदालत किसी तहरीर की मुहताज नहीं
वक़्त ने हर कस-ओ-ना-कस को सज़ाएँ दीं हैं

ज़िंदगी तुझ को बरहना नहीं रक्खा है कभी
हम ने हर दर्द को लफ़्ज़ों की क़बाएँ दीं हैं

सिर्फ़ फ़य्याज़ी के क़िस्से न मुअर्रिख़ लिखना
बुझते शो'लों को भी तो उस ने हवाएँ दीं हैं

शायरी यूँही नहीं पुख़्ता मिरी ऐ 'शौकी'
मेरे उस्ताद ने कुछ ऐसी दुआएँ दीं हैं