उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri dahliz tak jo aaya tha

तेरी दहलीज़ तक जो आया था

تیری دہلیز تک جو آیا تھا

शायर: Chetan Panchal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी दहलीज़ तक जो आया था
दिल ही दिल में तो मुस्कुराया था

एक के बा'द एक चल ही दिए
जिस्म भी रूह सा पराया था

तुम जहाँ भी रहो अदब से रहो
कुछ बुज़ुर्गों ने ये सिखाया था

कैसे करता मैं दिल की बातों को
मुझ पे ख़ामोशियों का साया था

तू ही मुझ को बता दे ऐ 'चेतन'
कौन मेरे क़रीब आया था