उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pahle mujhko faraaz hona hai

पहले मुझ को फ़राज़ होना है

پہلے مجھ کو فراز ہونا ہے

शायर: Chetan Panchal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पहले मुझ को फ़राज़ होना है
फिर मुझे दिल-नवाज़ होना है

मैं तिरे साथ चल रहा हूँ अब
मुझ को भी सरफ़राज़ होना है

चारा-साज़ी में रब की रहमत हो
शुक्रिये में नमाज़ होना है

साथ माँ बाप की दु'आएँ हैं
'उम्र को तो दराज़ होना है

इस ज़माने में रहने को 'चेतन'
तुझ को कुछ दुनिया-साज़ होना है