उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri chashm-e-karam rahe mahfuz

तेरी चश्म-ए-करम रहे महफ़ूज़

تیری چشم کرم رہے محفوظ

शायर: saabir jauharii7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी चश्म-ए-करम रहे महफ़ूज़
आँधियों में भी हम रहे महफ़ूज़

अज़्मत-ए-ज़िंदगी इसी से है
लज़्ज़त-ए-दर्द-ओ-ग़म रहे महफ़ूज़

सैफ़-ओ-नेज़ा से क्या ग़रज़ हम को
बस हमारा क़लम रहे महफ़ूज़

ज़ब्त-ए-ग़म का यही तक़ाज़ा है
उन का दस्त-ए-सितम रहे महफ़ूज़

तेरी यादों की शम्अ' रौशन है
रौनक़-ए-शाम-ए-ग़म रहे महफ़ूज़

आसमाँ ने बहुत सितम ढाए
फिर भी वल्लाह हम रहे महफ़ूज़

ता-क़यामत ख़ुदा करे 'साबिर'
शम्अ'-ए-ताक़-ए-हरम रहे महफ़ूज़