उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil jis ka aaine ki tarah pak-saf hai

दिल जिस का आइने की तरह पाक-साफ़ है

دل جس کا آئنے کی طرح پاک صاف ہے

शायर: saabir jauharii6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल जिस का आइने की तरह पाक-साफ़ है
क्या बात है ज़माना उसी के ख़िलाफ़ है

वो शख़्स कर रहा है मोहब्बत का क़त्ल-ए-आम
नफ़रत का जिस की फ़िक्र पे हर दम ग़िलाफ़ है

सज्दा नमाज़-ए-शौक़ का करती हैं तितलियाँ
दामन हर एक गुल का बहुत पाक-साफ़ है

हम ने ख़ुदा बना दिया जिस को तराश कर
वो संग-ए-राह आज हमारे ख़िलाफ़ है

दुनिया समझ रही है मुझे साहिब-ए-ज़बाँ
मेरा भी पर दुरुस्त कहाँ शीन क़ाफ़ है

तू हो रहा है लज़्ज़त-ए-दुनिया से शाद-काम
'साबिर' बता ये कैसा तिरा एतकाफ़ है