उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jitne bhi suraj ke neze the nukile ho gae

जितने भी सूरज के नेज़े थे नुकीले हो गए

جتنے بھی سورج کے نیزے تھے نکیلے ہو گئے

शायर: saabir jauharii6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जितने भी सूरज के नेज़े थे नुकीले हो गए
ज़िंदगी की शाख़ के सब फूल पीले हो गए

हम ने होंटों पर सजाए जब मोहब्बत के गुलाब
ख़ून के प्यासे हमारे ही क़बीले हो गए

वक़्त ने शाख़ों से अपनी कर दिया उन को अलग
सब्ज़ पत्ते पेड़ के जिस वक़्त पीले हो गए

क़ब्र की तारीकियाँ कुछ बढ़ गईं तो क्या हुआ
मेरी बेटी के तो सूने हाथ पीले हो गए

कौन जाने चल पड़ी है बाग़ में कैसी हवा
वक़्त से पहले ही सारे फल रसीले हो गए

आँधियाँ हसरत से अपना सर पटकती रह गईं
बच गए वो पेड़ 'साबिर' जो लचीले हो गए