उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere kuche ki hua lag gai shayad usko

तेरे कूचे की हुआ लग गई शायद उस को

تیرے کوچے کی ہوا لگ گئی شاید اس کو (ردیف .. ے)

शायर: Lala Madhav Ram Jauhar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे कूचे की हुआ लग गई शायद उस को
रोज़ बे-पर की उड़ाता है कबूतर हम से

हम सुलैमान बनेंगे जो परी होगे तुम
होश में आओ कहाँ जाओगे उड़ कर हम से

गालियाँ कौन सुने जब न रहा कुछ मतलब
आज से कीजिएगा बात समझ कर हम से

हम किसी और को ताकेंगे तुम्हारे होते
क्या कहा फिर तो कहो आँख मिला कर हम से

आप हो जाएँगे सीधे कहीं दिन हों सीधे
वो भी टेढ़े हैं जो टेढ़ा है मुक़द्दर हम से

वो भी क्या दिन थे कि जब रहती थीं नीची नज़रें
चार आँखें जो हुईं फिर गए तेवर हम से