उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aao baiTho hanso maza ho

आओ बैठो हँसो मज़ा हो

آؤ بیٹھو ہنسو مزا ہو

शायर: Lala Madhav Ram Jauhar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आओ बैठो हँसो मज़ा हो
कुछ तो फ़रमाओ क्यूँ ख़फ़ा हो

लौ शम्अ' की बुझने को है ऐ गुल
महफ़िल में न कोई दिल जला हो

दिल का दुखना उसी से कहिए
जो दर्द की क़द्र जानता हो

शीशा तलवों में चुभ न जाए
ठुकराते हो दिल को कज-कुलाहो

बहकी बहकी हों उस की बातें
साक़ी साक़ी पुकारता हो

उजली उजली सी चाँदनी में
गोरा गोरा बदन खुला हो