उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bara mahine hijr ke guzre malal mein

बारा महीने हिज्र के गुज़रे मलाल में

بارہ مہینے ہجر کے گزرے ملال میں

शायर: Lala Madhav Ram Jauhar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बारा महीने हिज्र के गुज़रे मलाल में
लाखों ही रंज हम ने सहे एक साल में

लाते नहीं फ़क़ीर किसी को ख़याल में
अल्लाह वाले मस्त हैं अपने ही हाल में

तकलीफ़-ए-क़ैद-ए-ज़ुल्फ़ मिरे दिल से पूछिए
ख़ालिक़ कहीं फँसाए न मछली को जाल में

सुन कर सवाल-ए-वस्ल वो 'जौहर' से कहते हैं
कुछ बात हो तो आए हमारे ख़याल में