उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere dar ke faqir hain hum log

तेरे दर के फ़क़ीर हैं हम लोग

تیرے در کے فقیر ہیں ہم لوگ

शायर: Zaheen Shah Taji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे दर के फ़क़ीर हैं हम लोग
क्या अमीर-ओ-कबीर हैं हम लोग

दोनों 'आलम की क़ैद से आज़ाद
एक तेरे असीर हैं हम लोग

हुस्न-ओ-ख़ूबी में बे-मिसाल हैं आप
'इश्क़ में बे-नज़ीर हैं हम लोग

दिल में रखते हैं चाँद सी सूरत
क्या ही रौशन ज़मीर हैं हम लोग

सर-बरहना 'ज़हीन' ख़ाक-नशीन
अहल-ए-ताज-ओ-सरीर हैं हम लोग