उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taslim un aankhon ka ejaz-e-masihai

तस्लीम उन आँखों का एजाज़-ए-मसीहाई

تسلیم ان آنکھوں کا اعجاز مسیحائی

शायर: Balraj Hairat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तस्लीम उन आँखों का एजाज़-ए-मसीहाई
लेकिन ये बता आख़िर किस किस ने शिफ़ा पाई

वीराना-ए-हसरत में तुम कैसे चले आए
हो जाए न फिर बरहम मुझ से मिरी तन्हाई

हर शहर-ए-निगाराँ का दस्तूर यही देखा
चुप रहिए तो महरूमी कुछ कहिये तो रुस्वाई

मलहूज़-ए-नज़र जब तक आदाब रहे ग़म के
जीने से भी शरमाए मरते भी हया आई

तफ़्सीर-ए-जुनूँ 'हैरत' मौज़ू’ ही ऐसा था
दुनिया मिरी बातों पर मुश्किल से यक़ीं लाई