उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek faKHta ye puchh rahi hai hawaon se

इक फ़ाख़्ता ये पूछ रही है हवाओं से

اک فاختہ یہ پوچھ رہی ہے ہواؤں سے

शायर: Balraj Hairat8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक फ़ाख़्ता ये पूछ रही है हवाओं से
कब तक चलेगा काम तुम्हारी दु'आओं से

मोती लुटा रहे हैं सितारे अदाओं से
ख़ैरात ज़ौ की लाए हैं सूरज के गाओं से

ऐ इंतिहा-ए-शौक़ ज़रा सब्र कर अभी
उलझा हुआ है ज़ेहन अभी इब्तिदाओं से

ऐ तीरगी के साँप मिरे दिल पे लोट जा
तेरा ही ज़िक्र-ए-ख़ैर था धुँदली फ़ज़ाओं से

दी हैं जो आह-ए-नीम-शबी ने बसीरतें
काफ़ूर हो न जाएँ सहर की दु'आओं से

नन्हा सा इक फ़रिश्ता खड़ा देखता रहा
कुछ कह रहा था आदमी बरगद की छाओं से

शब-भर भंभोड़ता रहा कुत्ता क़यास का
ऐसी भी दिल-लगी न किया कर गदाओं से

'हैरत' ये ए'तिक़ाद का अंधा कुआँ नहीं
बच कर निकल शु'ऊर की जलती चिताओं से