उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hassas dil tha sharm se nam-dida ho gaya

हस्सास दिल था शर्म से नम-दीदा हो गया

حساس دل تھا شرم سے نم دیدہ ہو گیا

शायर: Balraj Hairat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हस्सास दिल था शर्म से नम-दीदा हो गया
नाहक़ मैं उस की बात पे रंजीदा हो गया

तुझ से मफ़ारिक़त का नहीं ग़म तो इस का है
मैं ख़ुद भी अपने वास्ते नादीदा हो गया

साग़र उछलते देख के क्यों रो पड़ी घटा
माहौल दफ़'अतन बड़ा संजीदा हो गया

बूढ़ी हवा ने प्यार से फेरा था सर पे हाथ
पत्ता 'अजीब ख़ौफ़ से लर्ज़ीदा हो गया

'हैरत' किसी का अपने मुक़द्दर पे बस नहीं
परवाना ख़ुद ही शम' का गिरवीदा हो गया