उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankh mein aansu nazar mein dard paida kar gaya

आँख में आँसू नज़र में दर्द पैदा कर गया

آنکھ میں آنسو نظر میں درد پیدا کر گیا

शायर: Balraj Hairat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँख में आँसू नज़र में दर्द पैदा कर गया
मेरा हँसने का इरादा क्या ग़ज़ब ढा कर गया

मैं ने बरसातों में जलते घर कभी देखे न थे
मैं इसी बा'इस तिरे ग़म को गवारा कर गया

मेरी कोशिश थी मुक़द्दर को नई जिहतें मिलीं
और इसी कोशिश में ख़ुद को बे-सर-ओ-पा कर गया

ख़ुश-यक़ीनी भी खिला देती है कैसे कैसे गुल
एक दिन वल्लाह मैं ख़ुद पर भरोसा कर गया

बात उसूलों की नहीं है बात कुछ क़द्रों की है
ख़्वाब झूटे थे मगर मैं उन को सच्चा कर गया

बस यही सूरत छुपाने की इन्हें निकली कि मैं
हर किसी के सामने ज़ख़्मों को नंगा कर गया

मुद्दतों मेरी हयात उम्मीद का महवर रही
फिर कोई शख़्स आ के 'हैरत' सब कुछ उल्टा कर गया