उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tariq-e-girya ab is se behtar nahin milega

तरीक़-ए-गिर्या अब इस से बेहतर नहीं मिलेगा

طریق گریہ اب اس سے بہتر نہیں ملے گا

शायर: Zafar Gorakhpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तरीक़-ए-गिर्या अब इस से बेहतर नहीं मिलेगा
कि एक आँसू भी कोई बाहर नहीं मिलेगा

ये शहर भेदों भरा यहाँ आदमी मिलेंगे
मगर किसी के भी दोश पर सर नहीं मिलेगा

मिलेगा दफ़्तर तो छूट जाएगा घर कहीं पर
जो घर मलेगा कहीं तो दफ़्तर नहीं मिलेगा

ज़मीं पे पक्की इमारतें उग रही हैं ऐसे
दिवाने सर फोड़ने को पत्थर नहीं मलेगा

छलकती आँखों हरी-भरी मुस्कुराहटों बिन
मिलेंगे दीवार-ओ-दर यहाँ घर नहीं मिलेगा

मिलेगी दुनिया मिलोगे तुम सब मिलेंगे लेकिन
हमारा वो गुम-शुदा मुक़द्दर नहीं मिलेगा