उर्दू शायरी · ग़ज़ल

beach manjdhaar diya baDh ke sahaara kis ne

बीच मंजधार दिया बढ़ के सहारा किस ने

بیچ منجدھار دیا بڑھ کے سہارا کس نے

शायर: Zafar Gorakhpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बीच मंजधार दिया बढ़ के सहारा किस ने
हम तो तन्हा थे हमें पार उतारा किस ने

ज़िंदगी तुझ को शब-ओ-रोज़ के दोज़ख़ में तिरे
जिस तरह हम ने गुज़ारा है गुज़ारा किस ने

हाल अब ये कि अंधेरा मिरे ख़ूँ का प्यासा
रख दिया है मिरी मुट्ठी में सितारा किस ने

सर-बुरीदा कोई बच्चा मिरे अंदर हर रोज़
पूछता रहता है मुझ से मुझे मारा किस ने

पाँव लग जाएँ तसव्वुर को तो हम चल निकलें
हम को ख़्वाबों की गुज़रगह से पुकारा किस ने

इश्क़ नुक़सान का सौदा था 'ज़फ़र' मेरे बा'द
जाने बर्दाश्त किया मेरा ख़सारा किस ने