उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhup hai kya aur saya kya hai ab malum hua

धूप है क्या और साया क्या है अब मालूम हुआ

دھوپ ہے کیا اور سایا کیا ہے اب معلوم ہوا

शायर: Zafar Gorakhpuri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धूप है क्या और साया क्या है अब मालूम हुआ
ये सब खेल तमाशा क्या है अब मालूम हुआ

हँसते फूल का चेहरा देखूँ और भर आए आँख
अपने साथ ये क़िस्सा क्या है अब मालूम हुआ

हम बरसों के ब'अद भी उस को अब तक भूल न पाए
दिल से उस का रिश्ता क्या है अब मालूम हुआ

सहरा सहरा प्यासे भटके सारी उम्र जले
बादल का इक टुकड़ा क्या है अब मालूम हुआ