उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tanhai ki aaghosh mein tha subh se pahle

तन्हाई की आग़ोश में था सुब्ह से पहले

تنہائی کی آغوش میں تھا صبح سے پہلے

शायर: Aamir Shauqi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तन्हाई की आग़ोश में था सुब्ह से पहले
मिलती रही उल्फ़त की सज़ा सुब्ह से पहले

शायद मिरे लफ़्ज़ों पे तरस आए उसे अब
रोते हुए माँगी है दुआ सुब्ह से पहले

साया भी मिरा खो गया तारीकी-ए-शब में
ज़ुल्मत का असर ऐसा रहा सुब्ह से पहले

जब रात में सो जाती है ये सारी ख़ुदाई
देता है मुझे कौन सदा सुब्ह से पहले

शायद कि मुक़द्दर में न हो कल का ये सूरज
हो जाए हर इक क़र्ज़ अदा सुब्ह से पहले

'शौकी' तुझे मिल जाएँगे शैख़ और बरहमन
इस शहर के मयख़ाने में आ सुब्ह से पहले