उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam ret pe bikhra hai tan udasi ka

तमाम रेत पे बिखरा है तन उदासी का

تمام ریت پہ بکھرا ہے تن اداسی کا

शायर: Vijay Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम रेत पे बिखरा है तन उदासी का
वो लहर है या कोई पैरहन उदासी का

है इक दरीचा जहाँ से वो देखती है अतीत
सो लग गया मिरे कमरे में मन उदासी का

में उस की छाँव में बैठूँ तो जिस्म जलता है
मिरे शजर पे लगा है गहन उदासी का

हमारे इश्क़ को क़ुदरत ने जान बख़्शी है
तुम इक सुकूत हो और मैं हूँ बन उदासी का

तुम्हारे हिज्र में इक मौत और उस के बा'द
हमारी रूह ने पकड़ा बदन उदासी का