उर्दू शायरी · ग़ज़ल

takallufat mein lamhat mat ganwaya kar

तकल्लुफ़ात में लम्हात मत गँवाया कर

تکلفات میں لمحات مت گنوایا کر

शायर: Vazahat Nseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तकल्लुफ़ात में लम्हात मत गँवाया कर
बिला-इरादा भी थोड़ा सा मुस्कुराया कर

हमारे सामने ये वज़्अ मत बनाया कर
फ़राख़-दिल है तो हर बात भूल जाया कर

हमारे शे'र तिरा ज़िक्र बात एक ही है
हमारे शे'र हमें याद मत दिलाया कर

तबीअतों की रवानी न जाने क्या दिखलाए
किसी के ज़ाहिरी अहवाल पर न जाया कर

किसी को ये लब-ओ-लहजा भला लगा है 'नसीम'
ग़ज़ल भी तू इसी अंदाज़ में सुनाया कर