उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil itni kashakash se nikal jae to achchha

दिल इतनी कशाकश से निकल जाए तो अच्छा

دل اتنی کشاکش سے نکل جائے تو اچھا

शायर: Vazahat Nseem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल इतनी कशाकश से निकल जाए तो अच्छा
ये फूल किसी आग में जल जाए तो अच्छा

मा'यूब जो लहजे हैं वो मा'तूब न होंगे
अपना ही ये अंदाज़ बदल जाए तो अच्छा

इंसान को इंसाँ ही कहा जाए तो बेहतर
तश्बीह-ए-मह-ओ-मेहर बदल जाए तो अच्छा

बे-नूर सितारों की गवाही के बजाए
मिज़्गाँ पे कोई अश्क मचल जाए तो अच्छा

तरवीज-ए-मोहब्बत के लिए शे'र कहूँगी
ये रोग हर इक ज़ात में पल जाए तो अच्छा

फ़र्सूदा-रवी ऐसी कि हम ने भी ये सोचा
दिल कू-ए-मलामत से निकल जाए तो अच्छा

जिस ने कभी मिलने की भी पर्वा नहीं की है
उस तक जो 'नसीम' अपनी ग़ज़ल जाए तो अच्छा