उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suna karo meri jaan in se un se afsane

सुना करो मिरी जाँ इन से उन से अफ़्साने

سنا کرو مری جاں ان سے ان سے افسانے

शायर: Kaifi Azmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुना करो मिरी जाँ इन से उन से अफ़्साने
सब अजनबी हैं यहाँ कौन किस को पहचाने

यहाँ से जल्द गुज़र जाओ क़ाफ़िले वालो
हैं मेरी प्यास के फूँके हुए ये वीराने

मिरे जुनून-ए-परस्तिश से तंग आ गए लोग
सुना है बंद किए जा रहे हैं बुत-ख़ाने

जहाँ से पिछले पहर कोई तिश्ना-काम उठा
वहीं पे तोड़े हैं यारों ने आज पैमाने

बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने

हुआ है हुक्म कि 'कैफ़ी' को संगसार करो
मसीह बैठे हैं छुप के कहाँ ख़ुदा जाने