उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sitamgaron ka sitam hum pe aam aaj bhi hai

सितमगरों का सितम हम पे 'आम आज भी है

ستم گروں کا ستم ہم پہ عام آج بھی ہے

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सितमगरों का सितम हम पे 'आम आज भी है
हमारे वास्ते हर सुब्ह शाम आज भी है

जिन्हों ने राह-ए-वफ़ा में लुटा दिया सब कुछ
वो मर गए हैं मगर उन का नाम आज भी है

उन्हों ने दिल से हमें दूर कर दिया लेकिन
हमारे दिल में तो उन का क़ियाम आज भी है

त'अल्लुक़ात अगर मुंक़ता' हुए तो क्या
हमारा उन से दु’आ-ओ-सलाम आज भी है

मुझे ये हक़ भी नहीं है कि हक़ की बात कहूँ
ज़बाँ 'अदू की मिरे बे-लगाम आज भी है

जो बद-म'आश हैं चलता है राज उन का तो
शरीफ़ लोगों का जीना हराम आज भी है

ये किस ने कह दिया आज़ाद हम हुए 'फ़ैसल'
हमारा दिल तो किसी का ग़ुलाम आज भी है