उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sitare aa gae zikr-e-gulab KHatm hua

सितारे आ गए ज़िक्र-ए-गुलाब ख़त्म हुआ

ستارے آ گئے ذکر گلاب ختم ہوا

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सितारे आ गए ज़िक्र-ए-गुलाब ख़त्म हुआ
किताब-ए-‘इश्क़ का इक और बाब ख़त्म हुआ

बहुत दिनों में जुनूँ ने मुक़ाबला जीता
बहुत दिनों में तिलिस्म-ए-किताब ख़त्म हुआ

ख़मोश रह के ज़रा उस ने फेर लीं नज़रें
मिरे सवाल का शायद जवाब ख़त्म हुआ

मिरी निगाह की वो धूम थी कि बस्ती में
इसी सबब से रिवाज-ए-नक़ाब ख़त्म हुआ

किसी ने कर दिया आने से दाइमी इंकार
बरस महीनों दिनों का हिसाब ख़त्म हुआ

टपक के मिल गई आँसू की बूँद मिट्टी में
हवा में शोर था इक और हबाब ख़त्म हुआ

बहुत उदास हैं तकमील-ए-इम्तिहाँ पर हम
कि सारा लुत्फ़-ए-सवाल-ओ-जवाब ख़त्म हुआ