उर्दू शायरी · ग़ज़ल

silsile ke baad koi silsila raushan karen

सिलसिले के बाद कोई सिलसिला रौशन करें

سلسلے کے بعد کوئی سلسلہ روشن کریں

शायर: Zafar Gorakhpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिलसिले के बाद कोई सिलसिला रौशन करें
इक दिया जब साथ छोड़े दूसरा रौशन करें

इस तरह तो और भी कुछ बोझ हो जाएगी रात
कुछ कहें कोई चराग़-ए-वाक़िआ रौशन करें

जाने वाले साथ अपने ले गए अपने चराग़
आने वाले लोग अपना रास्ता रौशन करें

जलती बुझती रौशनी का खेल बच्चों को दिखाएँ
शम्अ रक्खें हाथ में घर में हवा रौशन करें

आगही दानिश दुआ जज़्बा अक़ीदा फ़ल्सफ़ा
इतनी क़ब्रें हाए किस किस पर दिया रौशन करें

शाम यादों से मोअत्तर है मुनव्वर है 'ज़फ़र'
आज ख़ुशबू के वज़ू से दस्त ओ पा रौशन करें