उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sine pe kare war jo KHanjar wahi achchha

सीने पे करे वार जो ख़ंजर वही अच्छा

سینے پہ کرے وار جو خنجر وہی اچھا

शायर: Charan Singh Bashar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सीने पे करे वार जो ख़ंजर वही अच्छा
जो खुल के सितम ढाए सितमगर वही अच्छा

शानों पे रहे या कि रहे नोक-ए-सिनाँ पर
जो ग़ैर के आगे न झुके सर वही अच्छा

दुश्मन है तो हमदर्द की सूरत न मिला कर
आए जो नज़र दूर से पत्थर वही अच्छा

दरियाओं के हमराह बहे धूप से खेले
धरती पे बरस जाए समुंदर वही अच्छा