उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sine ka dagh dagh farozan kiye hue

सीने का दाग़ दाग़ फ़रोज़ाँ किए हुए

سینے کا داغ داغ فروزاں کئے ہوئے

शायर: Raaz Muradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सीने का दाग़ दाग़ फ़रोज़ाँ किए हुए
बैठे हैं बज़्म-ए-दोस्त चराग़ाँ किए हुए

ओ जाने वाले दिल को बयाबाँ किए हुए
आना पड़ेगा चाक गरेबाँ किए हुए

यारब जुनून-ए-तर्क-ए-मोहब्बत की ख़ैर हो
वो आ रहे हैं अज़्म-ए-दिल-ओ-जाँ किए हुए

बैठे हैं बज़्म-ए-दोस्त में आशुफ़्तगान-ए-ग़म
अश्क-ए-चकीदा ज़ीनत-ए-मिज़्गाँ किए हुए

सरगर्म-ए-इल्तिफ़ात है फिर चश्म-ए-मुन्फ़इल
पलकों की ओट हश्र का सामाँ किए हुए

अब हम हैं और हसरत-ए-फ़स्ल-ए-बहार 'राज़'
मुद्दत हुई है चाक गरेबाँ किए हुए