उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chandni raat sogwar nahin

चाँदनी रात सोगवार नहीं

چاندنی رات سوگوار نہیں

शायर: Raaz Muradabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाँदनी रात सोगवार नहीं
जैसे अब उन का इंतिज़ार नहीं

अपनी ही आरज़ू में मरता हूँ
अब किसी का भी इंतिज़ार नहीं

अब जुनूँ है मिरा तमाम ही होश
अब गरेबान तार तार नहीं

दिल की बे-कैफ़ियों को क्या कीजे
फ़स्ल-ए-गुल है मगर बहार नहीं

इश्क़ वो नश्शा है कि जिस में 'राज़'
कैफ़-ओ-मस्ती तो है ख़ुमार नहीं