उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhari bahaar mein daman-e-darida hain hum log

भरी बहार में दामन-ए-दरीदा हैं हम लोग

بھری بہار میں دامن دریدہ ہیں ہم لوگ

शायर: Raaz Muradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भरी बहार में दामन-ए-दरीदा हैं हम लोग
हमें था ज़ो'म बहार-आफ़्रीदा हैं हम लोग

ये और बात कि दामन-दरीदा हैं हम लोग
ब-फ़ैज़-ए-'इश्क़ मगर सर-कशीदा हैं हम लोग

हम आइना हैं मगर अक्स-ए-ज़ात से महरूम
तिरी सदा हैं मगर ना-शुनीदा हैं हम लोग

जहाँ जहाँ भी गए हैं महक उठी है फ़ज़ा
तिरे फ़िराक़ की बू-ए-रसीदा हैं हम लोग

कड़ी है धूप शजर है न साया-ए-दीवार
बिछड़ के उस से सुकूँ-ना-चाशीदा हैं हम लोग

ये किस ने आइना-साज़ी का फ़न किया ईजाद
ये आइने हैं कि चेहरा-बुरीदा हैं हम लोग