उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib shan se nikle hain aaj diwane

अजीब शान से निकले हैं आज दीवाने

عجیب شان سے نکلے ہیں آج دیوانے

शायर: Raaz Muradabadi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अजीब शान से निकले हैं आज दीवाने
लबों पे मोहर-ए-ख़मोशी नज़र में अफ़्साने

मिरे जुनूँ की कोई हद नहीं रही शायद
ब-नाम-ए-इश्क़ वो आए हैं आज समझाने

निगाह-ए-लुत्फ़ मोहब्बत की मौत है ऐ दिल
ख़ुदा करे कि वो मुझ को कभी न पहचाने

निगाह-ए-मस्त की हैं आफ़रीनियाँ तौबा
नज़र उठी थी कि गर्दिश में आए पैमाने