उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai nang-e-ishq baz bhi aa aah aah se

ऐ नंग-ए-इश्क़ बाज़ भी आ आह आह से

اے ننگ عشق باز بھی آ آہ آہ سے

शायर: Raaz Muradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ नंग-ए-इश्क़ बाज़ भी आ आह आह से
वो हश्र-ए-रंग रंग उठा जल्वा-गाह से

उठो कि दिल को तमकनत-ए-इश्क़ पर है ज़ो'म
उलटो नक़ाब आग लगा दो निगाह से

बेगाना-वार इश्क़ की मंज़िल को तय किया
बच कर चला मैं ख़ार-ओ-ख़स-ए-रस्म-ओ-राह से

वो ग़म तो दे कि फ़ुर्सत-ए-यक-लहज़ा हो मुहाल
शर्मिंदा हो रहा हूँ ग़म-ए-गाह-गाह से

उस को न हो सकी कहीं आसूदगी नसीब
दिल थाम कर उठा जो तिरी बारगाह से

इस बारयाब-ए-हुस्न की उफ़्तादगी न पूछ
जो गिर गया निगाह में रह कर निगाह से