उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shoKHi ada ghurur shararat KHaridiye

शोख़ी अदा ग़ुरूर शरारत ख़रीदिए

شوخی ادا غرور شرارت خریدئیے

शायर: Hafeez Momin7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शोख़ी अदा ग़ुरूर शरारत ख़रीदिए
चाँदी उछालिए तो क़यामत ख़रीदिए

अस्लाफ़ के नुक़ूश किताबों में बंद हैं
बाज़ार से किसी की शबाहत ख़रीदिए

अटकी हुई है रूह पुरानी तराश में
किस दिल से अस्र-ए-हाल की जिद्दत ख़रीदिए

अहल-ए-जहाँ का और बदलने लगा मज़ाक़
फ़िक्र-ओ-नज़र भी हस्ब-ए-ज़रूरत ख़रीदिए

ज़ाहिर बहुत हसीन है बातिन घिनावना
पछ्ताइएगा आप मुझे मत ख़रीदिए

क़ुरआन खोलने की ज़रूरत नहीं रही
बिकती है सुब्ह-ओ-शाम तिलावत ख़रीदिए

पक जाएगा तो आप टपक जाएगा जनाब
आँगन में शाख़ आई है फल मत ख़रीदिए