उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh karne ki mohlat kam hai

कुछ करने की मोहलत कम है

کچھ کرنے کی مہلت کم ہے

शायर: Hafeez Momin7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ करने की मोहलत कम है
अब उम्रों में बरकत कम है

अक्सर बाहर ही रहता हूँ
क्या मेरा घर जन्नत कम है

चिड़ जाता हूँ लड़ जाता हूँ
सच सहने की आदत कम है

उन से आगे कैसे जाऊँ
जिन से मेरी क़िस्मत कम है

राई राई देने वाले
मुझ को पर्बत पर्बत कम है

सादा सादा बातें कीजे
अब ज़ेहनों को फ़ुर्सत कम है

'मोमिन' के अशआ'र सुनाओ
अफ़्सानों में लज़्ज़त कम है