उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jise hai zoam ki usne hawa ke par bandhe

जिसे है ज़ो'म कि उस ने हवा के पर बाँधे

جسے ہے زعم کہ اس نے ہوا کے پر باندھے

शायर: Hafeez Momin8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिसे है ज़ो'म कि उस ने हवा के पर बाँधे
अगर है दम तो हमारी दुआ के पर बाँधे

उठाए हाथ अज़ाब-ओ-बला के पर बाँधे
ये किस दुआ ने किसी बद-दुआ' के पर बाँधे

हुई न आज भी तौबा के टूटने की सबील
ख़ुदा ने आज भी काली घटा के पर बाँधे

कोई तो हो जो उसे रोक ले तबाही से
कोई तो हो जो दिल-ए-मुब्तला के पर बाँधे

हमारी सोच की परवाज़ रोकना था मुहाल
हमीं ने जान की बाज़ी लगा के पर बाँधे

कई दिनों से किसी का सलाम है न पयाम
मिरे अदू की बाज़ी लगा के पर बाँधे

शिफ़ा की आस लगाए मरीज़ बैठा है
दुआ को हाथ उठाए दवा के पर बाँधे

'हफ़ीज़' मौत से लुक़्मान बच सके कब तक
बड़े हकीम थे कब तक क़ज़ा के पर बाँधे