उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shanawar ko bachana chahiye tha

शनावर को बचाना चाहिए था

شناور کو بچانا چاہیئے تھا

शायर: Chandra Shekhar Varma9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शनावर को बचाना चाहिए था
नदी को डूब जाना चाहिए था

नहीं ढकना था तुम को आइने को
तुम्हें चेहरा छुपाना चाहिए था

उड़ाया किस लिए तुम ने परिंदा
तुम्हें पिंजरा उड़ाना चाहिए था

तुम्हें पा कर भी ये लगता है हम को
तुम्हें कुछ और पाना चाहिए था

वहाँ जा कर नज़र तुम ने उठाई
जहाँ पर सर झुकाना चाहिए था

उन्हों ने सुब्ह माँगी थी नई क्यों
जिन्हें सूरज पुराना चाहिए था

मैं कर सकता हूँ ये दावा था जिन का
उन्हें कर के दिखाना चाहिए था

वो इक क़िस्से पे राज़ी हो गया था
हमें पूरा फ़साना चाहिए था

निज़ामत के ज़रा आदाब सीखो
तुम्हें मिसरा उठाना चाहिए था