उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham se thi jo ziya ki ummid

शम' से थी जो ज़िया की उम्मीद

شمع سے تھی جو ضیا کی امید

शायर: Faisal Qadri Gunnauri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शम' से थी जो ज़िया की उम्मीद
ले गई उस को सबा की उम्मीद

'अहद-ओ-पैमान वही तोड़ गए
हम को जिन से थी बला की उम्मीद

अब किसी और का मुँह क्या देखें
हम को है तुझ से दु'आ की उम्मीद

ज़हर देने पे उतर आए हैं वो
जिन से रक्खी थी दवा की उम्मीद

आदमी हूँ मैं फ़रिश्ता न समझ
हर बशर से है ख़ता की उम्मीद

हौसला पस्त हुआ राह में जब
'इश्क़ ने तेरे 'अता की उम्मीद

महव-ए-हैरत हूँ वही काम आए
जिन से मुझ को थी दग़ा की उम्मीद

ज़िंदगानी का भरोसा क्या है
हर नफ़स रखिए क़ज़ा की उम्मीद

तुम भी नादान हो कितने 'फ़ैसल'
बे-वफ़ाओं से वफ़ा की उम्मीद