उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham’on ki tarah pighal rahe hain

शम’ओं की तरह पिघल रहे हैं

شمعوں کی طرح پگھل رہے ہیں

शायर: Tahir Tilhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शम’ओं की तरह पिघल रहे हैं
हम ग़म की चिता में जल रहे हैं

दिल में है हुजूम वसवसों का
आसेब खंडर में पल रहे हैं

दुनिया ने हज़ार रंग बदले
हम अपनी जगह अटल रहे हैं

लम्हात की तुंद आंधियों में
सदियों के चराग़ चल रहे हैं

जाना है कहाँ ख़बर नहीं कुछ
चलने का जुनूँ है चल रहे हैं

सूरज हो कि रात का अंधेरा
सब मेरे लहू पे पल रहे हैं

कुछ ऐसी कड़ी है धूप 'ताहिर'
पत्थर भी यहाँ पिघल रहे हैं