उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hota har qaid se aazad to achchha hota

होता हर क़ैद से आज़ाद तो अच्छा होता

ہوتا ہر قید سے آزاد تو اچھا ہوتا

शायर: Tahir Tilhari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

होता हर क़ैद से आज़ाद तो अच्छा होता
काश मैं पेड़ से टूटा हुआ पत्ता होता

वो है बस एक सराब उस का तआ'क़ुब न करो
अब्र होता तो कहीं टूट के बरसा होता

चाँद बन कर है तू मुहताज-ए-ज़िया-ए-ख़ुर्शीद
शम्अ' बनता तो किसी घर का उजाला होता

छीन लीं मुझ से उजालों ने तिरी यादें भी
इस से बेहतर था कि दुनिया में अंधेरा होता

न सही मेरे लिए सइ-ए-मुदावा न सही
कम से कम तुम ने मिरा हाल तो पूछा होता