उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baadh aai ganw ko dariya baha kar le gaya

बाढ़ आई गाँव को दरिया बहा कर ले गया

باڑھ آئی گاؤں کو دریا بہا کر لے گیا

शायर: Tahir Tilhari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बाढ़ आई गाँव को दरिया बहा कर ले गया
एक प्यासा दूसरे प्यासे को आ कर ले गया

रूह में सदियों का सन्नाटा बसा कर ले गया
मैं जो अर्ज़-ए-शहर से सहरा उठा कर ले गया

ज़ेहन की अलमारियों में धूल सी उड़ने लगी
कोई अल्फ़ाज़-ओ-मआ'नी सब चुरा कर ले गया

रह गया क़ाएम फिर उस की पाक-बाज़ी का भरम
फिर वो इक शैतान से ख़ुद को बचा कर ले गया

पहले की मानिंद लुत्फ़-ए-आबला-पाई नहीं
कौन मेरी राह के काँटे उठा कर ले गया

कौड़ियों के मोल 'ताहिर' बिक गई जिंस-ए-हुनर
माल-ए-मुफ़्लिस हर कोई क़ीमत घटा कर ले गया